प्रदूषण मुक्त दिवाली समय की प्रमुख आवश्यकता, खुशियों के त्योहार को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा न बनने दें लोग
होशियारपुर — शैक्षणिक संस्थान हिज एक्सीलेंट इंस्टीट्यूट एवं सेंट कबीर सीनियर पब्लिक हाई स्कूल चग्गरा, होशियारपुर के एम.डी. एवं बुद्धिजीवी व्यक्तित्व डॉ. आशीष सरीन ने लोगों से दिवाली का त्योहार पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने की अपील करते हुए कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में ही है। हमें अपनी खुशियों के लिए प्रकृति और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
डॉ. सरीन ने कहा कि दिवाली रोशनी, खुशहाली और आपसी भाईचारे का त्योहार है, लेकिन पटाखों के अनावश्यक इस्तेमाल से वायु और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रदूषण कम करने में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को दूषित करने के साथ-साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देता है। इसके अलावा तेज आवाज वाले पटाखे बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। पटाखों के कारण आग लगने और दुर्घटनाएं होने का खतरा भी बना रहता है।
डॉ. आशीष सरीन ने कहा कि हमें दिवाली के अवसर पर बिजली की अनावश्यक खपत से बचने के साथ-साथ मिट्टी के दीयों और स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे हमारी प्राचीन परंपराओं को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को भी सहारा मिलेगा। त्योहार को सादगी, स्वच्छता और आपसी भाईचारे के साथ मनाना ही इसका वास्तविक महत्व है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना समय की मांग है। स्कूलों और परिवारों को बच्चों को यह समझाना चाहिए कि प्रकृति की रक्षा केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंत में डॉ. सरीन ने समस्त देशवासियों से अपील की कि वे इस दिवाली पटाखों से परहेज करके अधिक से अधिक ग्रीन दिवाली मनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि हमें त्योहार इस तरह मनाना चाहिए, जिससे हमारी खुशियों के साथ-साथ पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
