चंडीगढ़, (अमरपाल नूरपुरी) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट ने आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया। सोमवार को सेक्टर-17 प्लाजा, चंडीगढ़ में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के बीच पहुंचे पायलट ने निजीकरण के फैसले पर सवाल उठाए। इस दौरान सैकड़ों बैंक कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए पायलट ने प्रस्तावित सौदे के औचित्य पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक न तो किसी राजनीतिक नेता की संपत्ति है और न ही किसी राजनीतिक दल या विचारधारा की, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय संपत्ति है।
पायलट ने कहा की यदि सरकार इतनी महत्वपूर्ण संस्था का निजीकरण करना चाहती है, तो इसके लिए एक उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। संसद को विश्वास में लेना जरूरी है। ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले संसदीय स्थायी समिति, संबंधित पक्षों, स्टेकहोल्डर्स और संबंधित मंत्रालयों से विचार-विमर्श होना चाहिए। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस कदम का उद्देश्य क्या है और निजीकरण से वह क्या हासिल करना चाहती है।
उन्होंने बैंक कर्मचारियों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि बैंक के भविष्य और अपने हितों को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर 2 और 3 नवंबर को आयोजित इस दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल में देशभर की 2,000 से अधिक शाखाओं में कार्यरत 10,000 से ज्यादा कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं।
