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Tuesday, January 27, 2026

ज़िला प्रशासन ने पराली जलाने के 90 मामलों में 2.25 लाख का वातावरण मुआवज़ा लगाया

जालंधर, 30 अक्तूबर (न्यूज़ हंट)- जालंधर जिले में धान की पराली को आग लगाने के रुझान को रोकने के लिए ज़िला प्रशासन की तरफ से 29 अक्तूबर तक पराली जलाने के 90 मामलों में 2.25 लाख रुपए का वातावरण मुआवज़ा लगाया गया है।
इस सम्बन्धित और ज्यादा जानकारी देते हुए डिप्टी कमिश्नर जालंधर श्री घनश्याम थोरी ने बताया कि अथारिटी की तरफ से पराली को आग लगाने की घटनाओं को रोकने के लिए आई.ई.सी. अभियान से ले कर इनफोरसमैंट अभियान तक बहुपक्षीय नीति को अपनाया जा रहा है।
डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि अब तक पराली जलाने के 13 मामलों में कार्यवाही के इलावा रेज ऐंटरीज़ की गई है। उन्होंने आधिकारियों को यह यकीनी बनाने के आदेश दिए कि सभी मामलों में रेड एंटरी को यकीनी बनाया जाये, जहाँ समर्थ अथारटीज़ की तरफ से पराली को जलाने की पुष्टि की जाती है।

श्री थोरी ने किसानों को धान की पराली को आग न लाने की अपील की क्योंकि इस आग के कारण होने वाला धुआँ अस्थमा के मरीज़ों की मुश्किल बढा सकता है, जो कि पहले ही कमज़ोर इम्यून सिस्टम से पीडित है।

डिप्टी कमिश्नर ने आधिकारियों को आदेश दिए कि पराली को आग लगाने की घटनाओं की मौके पर जा कर पुष्टि को यकीनी बनाते हुए इस तरह की घटनाओं पर तीखी नज़र रखी जाये। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि प्रशासन की तरफ से धान की पराली के सभ्यक प्रबंधन के लिए किसानों को कई प्रकार की सहायता देने के इलावा सस्ते रेट पर और विशेषकर छोटे और दर्मियाने किसानों को कस्टम हायर सैंटर से मुफ़्त मशीनरी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की तरफ से किसानों को मशीनरी उपलब्ध करवाने के लिए आई -खेत एप भी शुरू की गई है, जहाँ से किसान अपने पास के कस्टम हायर सैंटरों के पास उपलब्ध मशीनरी के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।

इस सम्बन्धित और जानकारी देते हुए अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर अमरजीत बैंस ने बताया कि खेतों में आग लगने की घटनाओं की रोज़ाना की निगरानी एक विस्तृत विधि के द्वारा यकीनी बनाई जा रही है, जहाँ फील्ड अधिकारी की तरफ से रिपोर्ट की गई हर घटना की फिजिकल वैरीफिकेशन की जाती है। इसके इलावा सहकारी, कृषि और ग्रामीण विकास पंचायत विभाग की तरफ से जागरूकता गतिविधियां भी करवाई जा रही है।

कार्यकारी इंजीनियर पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड सुखदेव सिंह ने बताया कि ज़िले में पिछले दो सालों में धान की पराली को आग लगाने की घटनाओं में 52 प्रतिशत कमी आई है और इस साल 29 अक्तूबर तक 389 मामले सामने आए है,जबकि साल 2019 में इसी अवधि दौरान दर्ज किये गए 734 मामलों के मुकाबले पिछले साल 683 केस सामने आए थे।

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