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Monday, April 13, 2026
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Karwa Chauth 2022 : पहली बार रखने जा रही हैं करवा चौथ का व्रत तो जान लें ये 10 जरूरी नियम

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Karwa Chauth 2022 : सनातन परंपरा में कार्तिक मास को कामनाओं की पूर्ति का मास माना गया है क्योंकि इस माह में जीवन से जुड़ी तमाम तरह की कामनाओं को पूरा करने वाले कई तीज-त्योहार आते हैं। इसी महीने महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान प्रदान करने वाला करवा चौथ व्रत भी आता है, जो कि 13 अक्टूबर 2022, गुरुवार को मनाया जा रहा है। सुहागिन स्त्रियों के द्वारा रखे जाने वाले इस व्रत को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर ही इस व्रत से जुड़े शुभ फल की प्राप्ति होती है।

  1. सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। यदि कोई महिला दिन एनर्जी से जुड़ी चीज का सेवन करना चाहती हैं तो वह सूर्योदय से पहले ग्रहण कर सकती है।
  2. इस दिन 16 श्रृंगार करके पूजा करने की परंपरा है, लेकिन ऐसा करते समय रंगों का चयन करते समय विशेष ख्याल रखें। करवा चौथ व्रत में भूलकर भी काले या सफेद रंग के कपड़े न पहनें क्योंकि इन्हें अशुभ माना गया है।
  3. करवा चौथ की पूजा सायंकाल से लगभग एक घंटा पूर्व उत्तर-पूर्व दिशा यानि ईशान कोण की ओर मुख करके करनी चाहिए। चंद्रोदय के समय उनका पूजन करते हुए अर्घ्य देना चाहिए।
  4. व्रत से जुड़ी कथा को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अवश्य कहना या फिर सुनना चाहिए।
  5. करवा चौथ व्रत की कथा सुनने के बाद सुहागिन महिला को अपनी सास को बया देना चाहिए।
  6. करवा चौथ व्रत को अमूमन सुहागिन स्त्रियां ही व्रत रखती हैं, लेकिन यदि किसी कन्या का विवाह तय हो चुका है तो वह वह भी अपने होने वाले पति के नाम का करवा चौथ व्रत रख सकती है, लेकिन उसे चंद्र दर्शन की बजाय तारों को देखकर व्रत खोलना चाहिए।
  7. इस दिन किसी पर क्रोध या किसी के साथ विवाद नहीं करना चाहिए। व्रत राने वाली महिला को किसी को अपशब्द या दिल दुखाने वाली बात भी नहीं बोलनी चाहिए।
  8. करवा चौथ व्रत के दिन व्रत को खोलने के लिए बनाए गए भोजन में लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और इसे ग्रहण करने से पहले अपने पति को इसे खाने के लिए देना चाहिए।
  9. पूजा के बाद विशेष रूप से अपने माता-पिता या फिर उनके समान स्त्री या पुरुष और अपने पति का आशीर्वाद लेना चाहिए।
  10. करवा चौथ के दिन किसी को दूध, दही, चावल या उजले वस्त्र दान नहीं देना चाहिए।
    (यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

आपके पास भी है 2000 रुपये का नोट, तो ये खबर जानना है आपके लिए बेहद जरुरी!

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Fake Currency: आपके पास 2,000 रुपये के नोट हैं तो ये जरूर चेक कर लें कहीं ये नोट जाली तो नहीं। हाल ही में एनसीआरबी ने जो डाटा जारी किया उसके मुताबिक 2021 में जितने जाली नोट सीज किए गए, उनमें से 60 फीसदी 2,000 रुपये के थे। आपको बता दें 2016 में 500 और 1000 रुपये पुराने नोट पर जब नोटबंदी के बाद वापस ले लिया गया जब 2,000 रुपये और 500 रुपये नए नोट जारी किए गए थे। जब सरकार ने कहा था कि नोटबंदी का बड़ा मकसद फेक करेंसी को खत्म करना है।
एनसीआरबी (National Crime Records Bureau) के मुताबिक 2021 में कुल 20.39 करोड़ रुपये के जाली नोट जब्त किए गए थे जिन में से 12.18 करोड़ रुपये के बराबर जाली नोट 2000 रुपये वाले थे, यानि कुल जब्त नोटों में 60 फीसदी 2,000 रुपये के थे। एनसीआरबी के मुताबिक जाली नोट का सीजर 2016 के मुकाबले बढ़ा है। 2016 में जहां 15.92 जाली नोट सीज किए गए थे, वहीं 2017 में 28.10 करोड़, 2019 में 17.95 करोड़, 2020 में 92.17 करोड़ रुपये और 2021 में 20.39 करो रुपये के जाली नोट पकड़े गए थे।
देश में 2,000 रुपये के नोट के सर्कुलेशन में भारी कमी आई है। RBI ने साल 2021-22 के लिए अपना सलाना रिपोर्ट ( RBI Annual Report) जारी किया जिसमें आरबीआई ने कहा कि 2020-21 में कुल करेंसी सर्कुलेशन ( Currency In Circulation) में 2,000 रुपये को नोटों की हिस्सेदारी 17.3 फीसदी थी वो घटकर अब 13.8 फीसदी रह गई है।

अनियंत्रित होकर खेतों में पलटी खचाखच भरी बोलेरो, किशोरी की मौत, दरबार साहिब माथा टेकने जा रहे थे 18 लोग

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न्यूज हंट. खन्ना : यूपी से अमृतसर श्री हरमंदिर साहिब (Sri Harmandir Sahib) माथा टेकने जा रहे श्रद्धालुओं से खचाखच भरी बोलेरो खन्ना के हाईवे पर गांव बाहोमाजरा के पास पलट गई। हादसा सोमवार तड़के हुआ जिसमें सिमरनजीत कौर (17) की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 17 लोगों को चोटें आईं। एक महिला जसविंदर कौर को ज्यादा चोटें लगी हैं जिसका अभी खन्ना के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोलेरो में नौ बच्चों सहित 18 लोग सवार थे। सभी यूपी के बिलासपुर शहर के आनंद नगर के रहने वाले हैं। तरसेम सिंह गाड़ी चला रहा था। अचानक उसकी आंख लग गई और गाड़ी बेकाबू होकर खेतों में जा गिरी। तरसेम सिंह की बेटी सिमरनजीत सिंह कौर आगे बैठी थी। हादसे के बाद वह गाड़ी से निकल कर सड़क पर जा गिरी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बाकी लोग खेतों में ही गिरे जिससे उन्हें ज्यादा चोंटे नहीं आईं।
घायलों में तरसेम सिंह (47), पलविंदर सिंह (30), मृतका का नाना हरदीप सिंह (95), नानी स्वर्ण कौर (87), सिमरनजीत कौर (16), गुरमेज कौर (50), मां जसविंदर कौर (43), लाड कौर (30), हरशदीप कौर (14) मनजोत सिंह (16), गुरिंदर कौर (14), हरमंदीप कौर (13) अनुरीत कौर (15), संदीप कौर (15), अबीजोत सिंह (16) व ऊपनप्रीत कौर (15) शामिल हैं जिन्हें खन्ना के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

Mulayam Singh Yadav : नहीं रहे मुलायम सिंह यादव, ऐसा रहा टीचर से नेताजी बनाने का सफर…

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न्यूज हंट. नई दिल्ली : मुलायम सिंह यादव ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षा के क्षेत्र से की थी। समाजवादी पार्टी के संस्थापक ने राजनीति से अपने जीवन पथ पर चलना शुरू नहीं किया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के करहल में जैन इंटर कॉलेज से करियर शुरू किया था, बाद में इसी मैनपुरी ने उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान दिलाई। जानकारी के मुताबिक बहुत कम समय में ही वे छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए थे। हालांकि, उन्हें तो नेता बनकर देश सेवा करनी थी, इसलिए ज्यादा दिन तक उसमें मन नहीं लगा और फिर लंबी राजनीतिक यात्रा पर निकल गए।
10 बार विधायक और 7 बार सांसद रहे मुलायम
22 नवबंर, 1939 को यूपी के इटावा जिले के सैफई गांव में जन्मे मुलायम सिंह यादव कुल तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वे 10 बार विधायक/विधान पार्षद और 7 बार संसद सदस्य रहे। सुघर सिंह और मूर्ति देवी के बेटे मुलायम ने 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी। एक ग्रामीण परिवेश से लेकर उन्होंने कैसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना एक व्यक्तित्व निर्माण किया और कैसे उनका जीवन और उनका संघर्ष लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का कारण बन गया।
मास्टरजी से नेताजी बन गए
1963 : मुलायम सिंह यादव इटावा में अपने शुरुआती दिनों से ही कुश्ती में पारंगत थे। फिर उन्होंने मैनपुरी के करहल स्थित जैन इंटर कॉलेज में हिंदी और सोशल साइंस में अध्यापन का कार्य शुरू किया।
1667 : शिक्षा के क्षेत्र से वह कम ही समय जुड़े रहे और इस साल वे मैनपुरी की जसवंतनगर सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर अपना पहला विधानसभा चुनाव जीत लिया। 1993 तक वे जसवंतनगर से ही 6 बार और चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे। लेकिन, इस दौरान उनकी पार्टियां बदलती रही। 1974 में भारतीय किसान दल, 1977 में भारतीय लोक दल, 1985 में लोकदल, 1989 में जनता दल, 1991 में समाजवादी जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर सफल हुए।
1977 : मुलायम सिंह यादव को लोकदल का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
1980 : जनता दल के अध्यक्ष बने। लेकिन, जसवंतनगर सीट से ही सिर्फ एक बार कांग्रेस के बलराम यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
1982 : विधान परिषद के सदस्य बने और वहां विपक्ष के नेता की भूमिका निभाई।
1985 : जसवंतनगर विधानसभा सीट पर दोबारा जीत दर्ज की और अब विधानसभा में विपक्षी दल के नेता चुने गए।
मुलायम तीन बार रहे यूपी के मुख्यमंत्री
1989 : मुलायम सिंह को पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। उन्होंने जनता दल सरकार की अगुवाई की, जिसे बीजेपी का समर्थन हासिल था।
1990 : बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर मुलायम सिंह यादव सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कांग्रेस के समर्थन से सरकार किसी तरह एक साल और चली। अयोध्या में कार सेवा करने पहुंचे कार सेवकों पर गोली चलवाने का आदेश दिया। इसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए। उस दौरान मुलायम ने घोषणा की थी कि अयोध्या में तब के विवादित स्थल पर ‘परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।’ उनके इस फैसले से उन्हें मुसलमान वोटरों का ऐसा साथ मिला, जो आज भी किसी ना किसी रूप में उनकी पार्टी के साथ बरकरार है।
1992 : मुलायम सिंह यादव ने जनता दल से अलग होकर अपनी अलग पार्टी बनाई और उसे समाजवादी पार्टी नाम दिया।
1993 : मुलायम सिंह यादव ने तब कांशीराम और मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया और सपा-बसपा गठबंधन सरकार में दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गए।
1995 : लखनऊ के कुख्यात गेस्ट हाउस कांड में बसपा नेता मायावती के साथ सपा कार्यकर्ताओं द्वारा हुई अभद्रता के बाद बीएसपी ने गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया। मुलायम की सरकार गिर गई और यहां से सपा-बसपा के बीच कटु संघर्ष का दौर शुरू हो गया, जो अगले 24 साल तक चलता रहा।
प्रधानमंत्री बनने की चाहत रखकर रक्षा मंत्री बने थे मुलायम
1996 : मुलायम ने पहली बार मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद की सदस्यता ग्रहण की। इस साल मुलायम ने प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचने के लिए भी हाथ-पैर मारे लेकिन, उन्हें दो साल तक देश के रक्षा मंत्री के पद पर रहने का अवसर जरूर मिल गया।
1998 : उन्होंने मैनपुरी लोकसभा सीट से एक बार फिर से जीत दर्ज की।
1999 : मुलायम ने इस बार संभल और कन्नौज दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर ही जीत दर्ज की।
2004 : इससाल वे वापस मैनपुरी से चुनाव जीते और 2009, 2014 और 2019 में भी यह सिलसिला बरकरार रखा। 2014 में वे मैनपुरी के अलावा आजमगढ़ से भी जीते थे और मैनपुरी सीट छोड़ दी थी।
2003: मुलायम सिंह यादव बसपा-भाजपा गठबंधन सरकार के गिरने के बाद तीसरी बार बीएसपी के एक गुट और कांग्रेस के कुछ बागियों के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने 2007 तक अपना तीसरा कार्यकाल पूरा किया।
2004 : मुलायम के नेतृत्व में यूपी में लोकसभा चुनावों में सपा का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन हुआ और पार्टी ने 80 में से 36 सीटें जीत लीं।
2007 : समाजवादी पार्टी बीएसपी से विधानसभा चुनाव हारकर सत्ता से बाहर हो गई। 1991 के बाद पहली बार मायावती के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। मुलायम 2009 तक विपक्ष के नेता की रोल में रहे।

Stomach Gas Problem : सुबह-सवेरे पेट में उठने लगी है गैस, ऐसे पाएं छुटकारा

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How to get rid of Stomach Gas: अगर आप भी सुबह पेट में उठने वाली गैस की दर्द से परेशान हैं तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि हम यहां आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप पेट की गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुबह पेट में गैस उठने के कई कारण हो सकते हैं। अगर आप डिनर के दौरान ज्यादा सलाद खाते हैं तो आपको गैस की दिक्कत हो सकती है। बींस, पत्तागोभी और फूलगोभी से पेट में गैस की दिक्कत होती है। उन लोगों में भी गैस की समस्या देखने को मिलती है जो कम मात्रा में पानी पीते हैं। कई महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होर्मोनल इम्बैलेंस से पेट में गैस उठता है क्योंकि कुछ होर्मोन पेट की गतिशीलता को कम करने का काम करते हैं। पेट में इंफेक्शन के चलते भी कई लोग गैस की दिक्कत से परेशान रहते हैं. डाइवर्टिक्युलाइटिस, अल्सरेटिव, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, कोलाइटिस, क्रोहन्स डिजीज और डायबिटीज जैसी दिक्कतों में भी पेट में गैस बनता है।

कैसे पाएंगे छुटकारा?

अगर खाने की वजह से पेट में गैस की दिक्कत है तो इससे छुटकारा पाने के लिए आप हल्के हाथों से पेट पर मालिश करें। यह तरीका बेहद कारगर है और इससे पेट की गैस दूर हो जाती है। इसके लिए आप कोई तेल लेकर पेट पर लगाएं और धीरे-धीरे मसाज करें। सेब का सिरका भी गैस की दिक्कत को दूर करता है। इसमें फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से आपको गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है। इसको पीने के लिए आप एक गिलास में गुनगुना पानी लें और इसमें एप्पल साइडर विनेगर डालें और इस पानी को सुबह खाली पेट पी लें। ऐसा करने से आपको गैस की दिक्कत में आराम मिलेगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें। NEWS HUNT इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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10 October 2022

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Tulsi के पास गलती से भी न रखें ये चीजें, वरना परिवार हो जाएगा कंगाल

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Tulsi Plant: माना जाता है कि तुलसी के पौधे में माता लक्ष्मी का वास होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो लोग तुलसी के पौधे पर रोजाना जल चढ़ाते हैं और नियमित रूप से उसकी देखभाल करते हैं उन पर मां लक्ष्मी कृपा बरसाती हैं। यह भी बताया गया है कि तुलसी के पास कुछ चीजें कभी नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं और आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि वे चीजें कौन सी हैं जो तुलसी के पौधे के पास कभी नहीं रखनी चाहिए और तुलसी के पौधे को किस दिशा में नहीं रखना चाहिए।

जूते-चप्पल रखें दूर : तुलसी एक पवित्र पौधा होता है। हमें गलती से भी उसके आसपास जूते-चप्पल रखने का स्टैंड नहीं बनाना चाहिए। जब भी आप कहीं बाहर से आएं तो तुलसी के पौधे के पास कभी भी जूते-चप्पल नहीं उतारने चाहिए। ऐसा करना तुलसी का अनादर होता है। जिसका पाप जातक को लगता है।
न फैलाएं गंदगी : वास्तु में कहा गया है कि तुलसी के पौधे के पास कभी भी गंदगी नहीं करनी चाहिए। रोजाना घर से निकलने वाले कूड़े को तुलसी से दूर रखना चाहिए। आपके घर में मां लक्ष्मी हमेशा वास करेंगी।
झाड़ू न रखें पास : धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी के पास झाड़ू रखने से तुलसी जी का अपमान होता है। इसकी यह वजह है कि झाड़ू का उपयोग घर की गंदगी साफ करने के लिए किया जाता है। ऐसे में तुलसी के पास कभी भी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए।
न लगाएं कांटेदार पौधा : वास्तु शास्त्र के मुताबिक तुलसी के पौधे के पास भूलकर भी कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है। साथ ही परिवार में कलह होने लगती है। अगर आप चाहें तो गुलाब का पौधा लगा सकते हैं। लेकिन वे भी कुछ दूरी पर ही होना चाहिए।
इस दिशा में न लगाएं तुलसी पौधा : तुलसी के पौधे को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। इस दिशा को पितरों का स्थान माना जाता है।दक्षिण में तुलसी का पौधा लगाने से कई मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। तुलसी का पौधा सही दिशा में लगाने से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है।
इस समय न तोड़ें : तुलसी माता को राधा रानी का भी रूप माना जाता है। जो कि सांयकाल में लीला करती हैं। ऐसे में शाम के समय इसकी पत्तियों को तोड़ने की मनाही होती है। तुलसी का खींचकर या नाखूनों से तोड़ना भी वर्जित माना जाता है। साथ ही इसकी पत्तियों को चबाए नहीं जीभ पर रखकर चूस सकते हैं।
डिसक्लेमर : ‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’