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अब नहीं लगाने पड़ेंगे RTO दफ्तर के चक्कर, पंजाब सरकार ने दी नए वाहनों की e-RC की इजाज़त

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न्यूज हंट. चंडीगढ़ : नए वाहनों की रजिस्ट्रेशन बिना किसी रूकावट के सुचारू तरीके से होनी सुनिश्चित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को एक नई नागरिक सेवा की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत राज्य भर में आम आदमी को राहत देने के लिए ऑटो-मोबाइल डीलरों के द्वारा नए वाहनों की ई-रजिस्ट्रेशन की इजाज़त दी गई है।
इस सेवा की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘यह ऐतिहासिक पहल है, जिससे आम आदमी घर बैठे ही स्मार्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने के योग्य होगा।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वाहन खरीदने के इच्छुक पंजाबियों के लिए यह सुविधा बड़ी राहत होगी। उन्होंने कहा कि जब से राज्य में सत्ता संभाली है, तब से ही समाज के हरेक वर्ग के कल्याण के लिए कई लोक-हितैषी कदम उठाए गए हैं। भगवंत मान ने कहा कि नए वाहन बेचने वाले प्राईवेट डीलरों को रजिस्ट्रेशन जारी करने का अधिकार देने का उद्देश्य लोगों को बड़ी राहत देना है, जिससे उनको नए वाहनों की रजिस्ट्रेशन के लिए रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी और सब-डिवीजनल मैजिस्टरेटों के दफ्तरों में लम्बी कतारों में ना खड़ा होना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी के समय, पैसे और ऊर्जा की बचत करने के अलावा इस कदम से लोगों को साफ़-सुथरा, पारदर्शी, कुशल और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन मुहैया करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्राईवेट डीलर नए वाहन मालिकों के लिए इस सुविधा का प्रयोग खरीददारों के आधार नंबर के द्वारा लॉगइन कर हासिल करेंगे। भगवंत मान ने कहा कि लॉगइन करने के बाद में डीलर नए वाहन का डेटा/दस्तावेज अपलोड करेगा और पड़ताल (वैरीफिकेशन) मालिक के आधार नंबर के साथ की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वाहन की रजिस्ट्रेशन के लिए फीस और टैक्स ऑनलाइन भरे जाएंगे और नए वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन नंबर मौके पर ही मिल जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की मंजूरी डीलर के स्तर पर ही हो जाएगी और हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट भी डीलर ही लगाएगा। भगवंत मान ने कहा कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट वाहन मालिक के मोबाइल फ़ोन पर आए लिंक से डाउनलोड किया जा सकेगा, जबकि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का स्मार्ट कार्ड सीधा मालिक के पते पर भेजा जाएगा।

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12 July 2022
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पंजाब में लोगों को नहीं काटने होंगे थानों के चक्कर, आनलाइन दर्ज होंगी शिकायतें, सीएम ने लांच किया पोर्टल

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न्यूज हंट. चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने सोमवार को राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पंजाब पुलिस (Punjab Police) का लोक शिकायत निवारण पोर्टल लांच किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पोर्टल को लांच करने का उद्देश्य नागरिकों को पुलिस स्टेशनों के चक्कर से बचना है। अब लोग घर बैठे कंप्यूटर पर एक क्लिक से अपनी अपनी शिकायत को आनलाइन दर्ज करवा सकेंगे। वहीं शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई इस पर भी निगरानी भी कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों को नागरिक केंद्रित शासन प्रदान करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि यह अनूठा साफ्टवेयर लोक शिकायत निवारण के लिए एक संपूर्ण समाधान प्रदान करेगा। शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए भगवंत मान ने कहा कि शिकायतकर्ता वेबसाइट Pgd.punjabpolice.gov.in पर जा सकते हैं। अपना नाम और मोबाइल नंबर भरने सहित कुछ सरल चरणों का पालन करके एक स्थायी खाता बनाएं।
इसके बाद उन्होंने कहा कि एक पासवर्ड जनरेट होगा और पोर्टल पर एक स्थायी खाता स्थापित किया जाएगा। भगवंत मान ने कहा कि इसके बाद शिकायतकर्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा। शिकायत की प्रगति को ट्रैक कर सकेगा। कार्यकारी डीजीपी गौरव यादव ने इसे पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। किस शिकायत पर कितनी देर में एक्शन हुआ। क्या कार्रवाई हुई यह साथ की साथ पता चलेगा। लोगों का समय बचेगा और उन्हें इंसाफ मिलेगा।

Supermoon 2022 : आ रही है गुलाबी चांदनी वाली रात, इस दिन होगा अनोखे चांद का दीदार

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Supermoon 2022: इस साल की सबसे बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक ‘सुपरमून’ जुलाई में ही दिखेगा। 13 जुलाई यानी बुधवार को इसे देखा जा सकेगा। सुपरमून तब दिखता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नज़दीक होता है। बुधवार को आसमान में सुपरमून का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। सुपरमून की रात चांद रोज के मुकाबले बहुत बड़ा, चमकीला व गुलाबी छटा बिखेरता है।
इस साल का सुपरमून 13 जुलाई की रात 12 बजकर 7 मिनट पर देखा जा सकेगा। इसके बाद यह अगले साल यानी 2023 में 3 जुलाई को नज़र आएगा। 13 जुलाई को सुपरमून के दिन साल का सबसे बड़ा चांद नज़र आएगा। इसे डीयर मून यानी हिरन चांद, थंडर मून, हे मून और विर्ट मून के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका में इसे सैल्मन मून, कैलमिंग मून और रास्पबेरी मून कहा जाता है।
सुपरमून शब्द 1979 में चलन में आया। इसकी खोज ज्योतिषी रिचर्ड नोले ने की थी। जब चंद्रमा पृथ्वी के निकटतम 90 प्रतिशत पेरिगी के दायरों में होता है तो इस खगोलीय घटना को सुपरमून कहा जाता है। सुपरमून एक आम खगोलीय घटना है जो साल में तीन बार होती है। ऐसा कुछ भी नहीं है कि इस दिन चंद्रमा में कुछ विशेष शक्तियां आ जाती हैं। इस दिन चांद रोज के मुकाबले बड़ा दिखाई देता है क्योंकि यह पृथ्वी के बेहद करीब होता है। इस खगोली घटना को पेरिगी के नाम से भी जाना जाता है।
सुपरमून हाई टाइड की संभावनाओं को बढ़ा देता है। इस दिन महासागरीय ज्वार की एक बड़ी श्रृंखला देखी जा सकती है। सुपरमून के चलते समुद्र में तूफान और किनारे पर बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है।

राघव चड्ढा को पंजाब सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारी, सलाहकार कमेटी के चेयरमैन नियुक्त

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न्यूज हंट. चंडीगढ़ : दिल्ली से आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को पंजाब सरकार (Punajb Government) में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। 1988 में जन्मे राघव चड्ढा को पंजाब सरकार द्वारा गठित सलाहकार कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह कमेटी पंजाब के लोगों की आम समस्याओं को सुनेगी और उसे लेकर समिति राज्य की सरकार को उस विषय पर सही काम करने यानी फैसला लेने की सलाह देगी।
असल में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई विभागों के साथ हुई बैठकों के बाद एक सलाहकार कमेटी का गठन किया था। कमेटी पूरी तरह से एडहाक होगी जो सरकार को केवल कामकाज में सुझाव देगी. इस कमेटी में एक चेयरमैन और कुछ सदस्य होंगे जिन्हें समय समय पर सरकार की ओर से नियुक्त किया जाएगा। अब इसी कमेटी का चेयरमैन राघव चड्ढा को बनाया गया है।
हालांकि इस नियुक्ति से पहले पंजाब में यह चर्चा बड़े जोरों पर रही कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी पंजाब का डिप्टी सीएम बनाने जा रही है। फिलहाल पंजाब के डिप्टी सीएम पद को लेकर इस तरह की अटकलें आज भी बड़ी तेजी से चल रही हैं। ऐसी चर्चाओं यानी कयासों के बीच उनके डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर हो रही लॉबिंग की जानकारी सामने आ रही है। कहा ये भी जा रहा है कि इस दिशा में कुछ नेता काम कर रहे हैं।

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, मत्तेवाड़ा जंगलों के समीप कोई औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं होगी

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न्यूज हंट. चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री ने आज ऐलान किया कि राज्य के जंगलों और बहुमूल्य जल स्रोतों को बचाने के लिए मत्तेवाड़ा के जंगलों के नज़दीक प्रस्तावित जगह पर कोई औद्योगिक इकाई नहीं लगेगी।
मत्तेवाड़ा जंगल बारे सार्वजनिक एक्शन कमेटी के साथ मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री ने ऐलान किया, ‘‘मैं स्पष्ट तौर पर बताना चाहता हूँ कि न सिर्फ़ मत्तेवाड़ा, बल्कि राज्य सरकार पंजाब के किसी भी नदी के किनारे कोई उद्योग स्थापित करने की इजाज़त नहीं देगी ताकि पानी के प्रदूषण को रोका जा सके।’’
मुख्यमंत्री ने दुख जताया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए इस प्रोजैक्ट के सभी पक्षों को जाँचे बगैर एक हज़ार एकड़ जगह में टेक्स्टाईल पार्क स्थापित करने की मंज़ूरी दे दी थी। उन्होंने कहा कि प्रोजैक्ट की प्रस्तावित जगह मत्तेवाड़ा जंगलों के नज़दीक और सतलुज नदी के किनारे पर है परन्तु इस प्रोजैक्ट से राज्य के वातावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को कैप्टन सरकार ने पूरी तरह से अनदेखा कर दिया। भगवंत मान ने कहा कि इस प्रोजैक्ट से न सिर्फ़ पेड़ काटे जाएंगे, बल्कि इससे नदी के पानी में बड़े स्तर पर प्रदूषण फैलेगा, जो इस क्षेत्र में वन्य जीवन के साथ-साथ मानवीय जीवन के लिए भी घातक सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने इस प्रोजैक्ट की गहराई के साथ जाँच की और पाया कि इससे इलाके का वातावरण संतुलन बिगड़ेगा। उन्होंने कहा कि वातावरण और मानवीय जीवन पर इस प्रोजैक्ट के बुरे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने फ़ैसला किया है कि इस ज़मीन पर कोई औद्योगिक इकाई नहीं स्थापित होगी। भगवंत मान ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार राज्य में हरियाली की हर कीमत पर रक्षा करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रस्तावित टेक्स्टाईल पार्क के लिए किसी अन्य जगह पर ज़मीन देने के लिए तैयार है परन्तु शर्त यह है कि इससे राज्य का पानी प्रदूषित न हो। भगवंत मान ने पंजाब को साफ़-सुथरा, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त करने के लिए वातावरण प्रदूषण को रोकने की अपनी सरकार की वचनबद्धता दोहराई।

ਤਿੰਨ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਕਣਕ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਮਿਲੇਗਾ ਆਟਾ, ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਹੋਮ ਡਿਲੀਵਰੀ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਟੈਂਡਰ ਜਾਰੀ

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न्यूज हंट. ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ : ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਖੁਰਾਕ ਸੁਰੱਖਿਆ ਕਾਨੂੰਨ ਤਹਿਤ ਲਾਭਪਾਤਰੀਆਂ ‘ਤੇ ਆਰਥਿਕ ਬੋਝ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਅਤੇ ਲਾਭਪਾਤਰੀ ਸੁਖਾਲੇ ਤੇ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਆਪਣਾ ਮਹੀਨਾਵਾਰ ਰਾਸ਼ਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਣ, ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਖੁਰਾਕ ਸਿਵਲ ਸਪਲਾਈ ਅਤੇ ਖਪਤਕਾਰ ਮਾਮਲੇ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਰਾਸ਼ਨ ਦੀ ਹੋਮ ਡਿਲਿਵਰੀ ਦੀ ਸੇਵਾ ਨੂੰ ਕਾਰਜਸ਼ੀਲ ਕਰਨ ਦਾ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਉਪਰਾਲਾ ਆਰੰਭਿਆ ਗਿਆ ਹੈ।
ਇਹਨਾਂ ਵੇਰਵਿਆਂ ਨੂੰ ਸਾਂਝਾ ਕਰਦਿਆਂ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਇੱਕ ਬੁਲਾਰੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਨਵੀਂ ਬਣੀ ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਸਹਿਕਾਰੀ ਡੀ2ਡੀ ਮਾਰਕਿਟਿੰਗ ਸੁਸਾਇਟੀ, ਲਿਮਟਿਡ ਵੱਲੋਂ ਡਿਲਿਵਰੀ ਸੇਵਾਵਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਨ ਅਤੇ ਫਲੋਰ ਮਿੱਲਾਂ ਨੂੰ ਸੂਚੀਬੱਧ ਕਰਨ ਲਈ ਟੈਂਡਰ ਜਾਰੀ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪਾਰਦਰਸ਼ਤਾ ਅਤੇ ਵਿਆਪਕ ਭਾਗੀਦਾਰੀ ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ, ਡਿਲਿਵਰੀ ਸੇਵਾਵਾਂ ਸਬੰਧੀ ਟੈਂਡਰ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਆਰਥਿਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਅਖ਼ਬਾਰ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਿਤ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਮੁਲਾਂਕਣ ਸਮੇਤ ਸਾਰੀ ਟੈਂਡਰ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਈ-ਪ੍ਰੋਕਿਊਰਮੈਂਟ ਪੋਰਟਲ ‘ਤੇ ਆਨਲਾਈਨ ਹੋਵੇਗੀ।
ਇਸ ਸੇਵਾ ਦੇ ਲਾਭਾਂ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਦਿਆਂ ਬੁਲਾਰੇ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਲਾਭਪਾਤਰੀ ਨੂੰ ਹੁਣ ਰਾਸ਼ਨ ਦੀਆਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ਬਾਹਰ ਲੰਬੀਆਂ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਡੀਕ ਕਰਨ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਦਿਹਾੜੀ ਛੱਡਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪਵੇਗੀ। ਉਹਨਾਂ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਖਰਾਬੀ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿਉਂ ਜੋ ਕਣਕ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਆਟੇ ਵਿੱਚ ਘਪਲੇਬਾਜੀ ਕਰਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਔਖਾ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਐਸਐਮਐਸ ਸੇਵਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਲਾਭਪਾਤਰੀ ਨੂੰ ਰਾਸ਼ਨ ਦੀ ਨਿਰਧਾਰਤ ਹੋਮ ਡਿਲਿਵਰੀ ਦੀ ਮਿਤੀ ਬਾਰੇ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਸੂਚਿਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ।
ਰਾਸ਼ਨ ਵੰਡ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਵਿੱਚ ਸੁਧਾਰ ਲਿਆਉਣ ਦੇ ਸਬੰਧ ਵਿੱਚ, ਬੁਲਾਰੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਹ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਆਟਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਅਨਾਜ ਦੀ ਸਾਲ ਭਰ ਦੌਰਾਨ ਨਿਰੰਤਰ ਵੰਡ ਕਰਨੀ ਜਾਰੀ ਰੱਖੀ ਜਾਵੇਗੀ, ਜੋ ਕਿ ਮੌਜੂਦਾ ਸਥਿਤੀ ਦੇ ਬਿਲਕੁਲ ਉਲਟ ਹੋਵੇਗਾ ਜਦੋਂ ਮੰਡੀਆਂ ਵਿੱਚ ਪੀਡੀਐਸ ਕਣਕ ਦੀ ਮੁੜ ਵਿਕਰੀ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਮਾਰਚ, ਅਪ੍ਰੈਲ ਅਤੇ ਮਈ ਦੌਰਾਨ ਕਣਕ ਵੰਡ ‘ਤੇ ਰੋਕ ਲਗਾਈ ਗਈ।
ਅਤਿ-ਆਧੁਨਿਕ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆਵਾਂ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿੱਚ ਦੱਸਦਿਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦੀਆਂ ਨਵੀਨਤਮ ਤਕਨੀਕਾਂ ਜਿਵੇਂ ਬਾਰ ਕੋਡ, ਸੀਸੀਟੀਵੀ, ਜੀਪੀਐਸ, ਪੀਓਐਸ ਡਿਵਾਈਸਾਂ ਨਾਲ ਬਾਇਓਮੀਟ੍ਰਿਕ ਪ੍ਰਮਾਣੀਕਰਣ ਆਦਿ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਸਰੋਤ (ਗੋਦਾਮ) ਤੋਂ ਮੰਜ਼ਿਲ (ਲਾਭਪਾਤਰੀ) ਤੱਕ ਕਣਕ ਦੇ ਹਰੇਕ ਦਾਣੇ ਦਾ ਪਤਾ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇਗਾ। ਵੰਡ ਦੀ ਸਮੁੱਚੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵਿਭਾਗ ਨੂੰ ਅਸਲ ਸਮੇਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਆਨਲਾਈਨ ਉਪਲਬਧ ਹੋਵੇਗੀ ਜੋ ਸਮੁੱਚੀ ਸਪਲਾਈ ਲੜੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਕ ਹੋਵੇਗੀ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਟੀਪੀਡੀਐਸ ਅਧੀਨ ਕਿਸੇ ਵੀ ਖਰਾਬੀ ਨੂੰ ਰੋਕਿਆ ਜਾ ਸਕੇਗਾ। ਵੱਖ-ਵੱਖ ਡਿਜੀਟਲ ਮੋਡ/ਵਾਲਟ ਜਿਵੇਂ ਭੀਮ, ਭਾਰਤਪੇ, ਪੇਟੀਐਮ, ਗੂਗਲ ਪੇ ਆਦਿ ਰਾਹੀਂ 2 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਭੁਗਤਾਨ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇਗਾ।
ਜ਼ਿਕਰਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਐਨਐਫਐਸਏ ਤਹਿਤ ਲਾਭਪਾਤਰੀ ਨੂੰ ਮੌਜੂਦਾ ਸਮੇਂ ਹਰ ਮਹੀਨੇ 5 ਕਿਲੋ ਕਣਕ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਦੀ ਥਾਂ ਹੁਣ ਆਟਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਇਸ ਨਾਲ ਸਮੇਂ ਦੀ ਬੱਚਤ ਹੋਵੇਗੀ ਅਤੇ ਲਾਭਪਾਤਰੀਆਂ ਨੂੰ 170 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਸਾਲਾਨਾ ਬੱਚਤ ਵੀ ਹੋਵੇਗੀ, ਜੋ ਕਿ ਗਰੀਬ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਰਕਮ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਆਮਦਨ ਅਤੇ ਬੱਚਤ ਕੋਵਿਡ ਮਹਾਂਮਾਰੀ ਸਦਕਾ ਕਾਫ਼ੀ ਘਟ ਗਈ ਹੈ।
ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਲਾਭਪਾਤਰੀਆਂ ਨੂੰ ਮੌਜੂਦਾ ਸਮੇਂ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਰਾਸ਼ਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਭੰਡਾਰਨ ਸਬੰਧੀ ਵੱਡੀ ਸਮੱਸਿਆ ਦਰਪੇਸ਼ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂ ਜੋ ਚਾਰ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਇੱਕ ਆਮ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋ ਕਣਕ ਮਿਲਦੀ ਹੈ। ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਇਹ ਆਮ ਵਰਤਾਰਾ ਬਣ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਕਣਕ ਨੂੰ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਆਟਾ ਚੱਕੀ ‘ਤੇ ਦੇ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਬਦਲੇ ਨਕਦ ਰਾਸ਼ੀ ਜਾਂ ਕੁਝ ਹੋਰ ਰਾਸ਼ਨ ਲੈ ਲੈਂਦੇ ਹਨ। ਆਟਾ ਦੀ ਵੰਡ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਨਾਲ ਚਾਰ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਹਰੇਕ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਹਰ ਮਹੀਨੇ 20 ਕਿਲੋ ਆਟਾ ਮਿਲੇਗਾ, ਜਿਸ ਦਾ ਭੰਡਾਰਨ ਕਰਨਾ ਵਧੇਰੇ ਸੁਖਾਲਾ ਹੋਵੇਗਾ।

PM unveils National Emblem cast on the roof of the new Parliament Building

Interacts with the Shramjeevis involved in the making of the Parliament

The Prime Minister, Shri Narendra Modi unveiled the National Emblem cast on the roof of the New Parliament Building today morning.
“This morning, I had the honour of unveiling the National Emblem cast on the roof of the new Parliament.

The Prime Minister also interacted with the Shramjeevis involved in the work of the new Parliament.

“I had a wonderful interaction with the Shramjeevis who have been involved in the making of the Parliament. We are proud of their efforts and will always remember their contribution to our nation.The National Emblem is made of bronze with a total weight of 9500 Kg and is 6.5 m in height. It has been cast at the top of the Central Foyer of the New Parliament Building. A supporting structure of steel weighing around 6500 Kg has been constructed to support the Emblem.

The concept sketch and process of casting the National Emblem on the roof of the New Parliament Building has gone through eight different stages of preparation from clay modelling/computer graphic to bronze casting and polishing.

Consultation on Public-Private Partnership in Digital Agriculture

The Department of Agriculture and Farmer Welfare, Government of India in association with the World Economic Forum (WEF), India organised a one-day stakeholder consultation on Public-Private Partnership in Digital Agriculture here today.

It was chaired by Shri Manoj Ahuja, Secretary, Department of Agriculture and Farmer Welfare. Shri Ahuja referred to the Union Budget speech for 2022-23 which reads out a policy vision on “Delivery of digital and hi-tech services to farmers with involvement of public sector research and extension institutions along with private agritech player and stakeholders of Agri value chain”.Subsequently, Shri Rajeev Chawla, Chief Knowledge Officer (A&FW) shared insights on the conceptual framework of Public-Private Partnership for Digital Agriculture. He also shared pertinent points on data sharing, technology validation and the need for a sandbox.
Shri Pramod Kumar Meherda, Joint Secretary (Digital Agriculture, DA&FW) spoke about the perspective of digital agriculture involving modern technologies which are transforming the agriculture sector. He also stressed the role of each stakeholder in realising the potential of digital agriculture.

From a state perspective, Shri Ajit Kesari, Additional Chief Secretary, Agriculture, Madhya Pradesh also shared his views on digital agriculture and it’s potential stressing the need for a framework for bringing technology into Agriculture.

Taking the session forward, Shri Purushottam Kaushik, Head, C4IR, WEF-India laid out the plan for stakeholder consultation. Six consultation groups were formed to deliberate on PPP Governance, Data, Sandbox, Access to Markets, Access to Finance and Access to Inputs and Advisories.The consultation was attended by more than 140 participants from diverse stakeholders including different state governments, state agriculture universities, ICAR, agritech start-ups, Agri industry, banks, think tanks, civil society, and farmer organisations.

Shri J. Satyanarayana, Chief Advisor, WEF-India and Shri Rajeev Chawla provided insights on how inputs from the consultation will be further deliberated to develop this initiative. The consultation ended with a vote of thanks by Shri Rakesh Kumari Tiwari, ITS, Director (Digital Agriculture, DA&FW).