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कमिश्नरेट पुलिस जालंधर का नशे के खिलाफ अभियान जारी, 5 आरोपी गिरफ्तार

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कमिश्नरेट पुलिस जालंधर जालंधर को नशा मुक्त बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह  वचनबद्ध

जालंधर, 26 जुलाई: पंजाब सरकार द्वारा नशे के खिलाफ शुरू किए गए ‘युद्ध  नशे के विरुद्ध ‘अभियान के तहत, कमिश्नरेट पुलिस जालंधर ने नशे और अपराध के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इस संबंध में, कमिश्नरेट जालंधर के अंतर्गत विभिन्न थानों में कुल पाँच एफ.आई.आर. दर्ज की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ आदतन अपराधी है। पुलिस ने इन आरोपियों से 90 ग्राम हेरोइन भी बरामद की है। युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान के तहत, कमिश्नरेट पुलिस जहाँ नशा तस्करों पर शिकंजा कस रही है, वही नशे की दलदल में फंसे लोगों के पुनर्वास के लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे है। इस पहल के तहत, 14 नशा पीड़ितों को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती करवाया गया, जिनमें से 11 को ओएट केंद्रों, 1 को धारा 64ए के तहत एन.डी.पी.एस अधिनियम और 2 को सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में रेफर किया गया। पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने कहा कि कमिश्नरेट पुलिस जालंधर शहर से नशे के खात्मे और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से नशे के खिलाफ मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाने और जालंधर को नशा मुक्त बनाने में सहयोग करने की अपील की।

सौरभ कालिया: कारगिल युद्ध के ‘गुमनाम हीरो’ के पिता 26 साल बाद आज तक किस बात की लड़ाई लड़ रहे हैं

बीबीसी: कारगिल युद्ध के 26 साल बीत जाने के बाद भी कैप्टन सौरभ कालिया के 78 साल के पिता एनके कालिया अपने बेटे से जुड़े एक मुद्दे को अमलीजामा पहनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं.

एक ऐसी लड़ाई जिसमें बीते 26 साल के दौरान उन्हें बहुत उम्मीद तो नहीं मिली है, लेकिन उनका कहना है कि जब तक उनकी सांसें चल रही हैं तब तक उन्हें उम्मीद है.

तो कौन हैं कैप्टन सौरभ कालिया? क्या है कारगिल युद्ध से उनका कनेक्शन और उनका परिवार इतने लंबे समय के बाद भी किस तरह की लड़ाई लड़ रहा है?

आपकी दिलचस्पी अगर इन सवालों में है तो फिर ये पूरी रिपोर्ट आपको पढ़नी चाहिए.

दरअसल कैप्टन सौरभ कालिया को कारगिल युद्ध का पहला ‘वॉर हीरो’ माना जा सकता है. वह इस युद्ध में मारे जाने वाले भारत के पहले सैन्य अधिकारी थे.